जब हम बच्चे थे

जब हम बच्चे थे, हर बात पे मुस्कुराते थे, चिड़िया उड़ के खेल खेल में हम भी उड़ जाते थे। दुनिया के रिवाज़ों से परे , हर किसी को दोस्त बनाते। जब हम बच्चे थे मम्मी की उँगली छुरा कर, हर बार उनसे आगे भगा करते थे। बिना किसी बंदिश के हर किसी से मिला … Continue reading जब हम बच्चे थे

कोशिश

दो घड़ी आप से बात न हुई तो आप और हमारे बीच की दास्ताँ बदल गई कल तक लोग हमें हम से पहचनतें थे और आज मैं और आप से लोग जानते हैं हमें न ख़ामोशी आप ने तोड़ी, न मैंने कोशिश की। फसलों  का क्या था, वो तो खामोशी के साथ बढ़ती गई। सबने … Continue reading कोशिश