Far from my eyes But closer to my sight Hidden in deep but bright light of truth Why can't I see if it is bright like night Twinkling or blinking? Was I busy in figuring that out Oh dear, You love the vibe

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To be free

Free from the shame You made me feel When you haunted me In my dream. Just for complexion

तू हर बार यूँ सफर पे क्या ढूंढ़ती है?

वही है रास्ते जो पहले थेकुछ बदला है अभी तो तुमतुम्हारे देखने का नज़रियातुम्हारी बेफिक्री के अंदाज़समय से ढलते दिन के साथतेरे खुशियों के बहाने बदल रहे हैंया तुमने जैसे बेफिक्री से जीना सिख लिया होया जिसे तुम बेफिक्री कह रही वो कँही एक बहाना तो नहीं।बहाना तेरे खुद से भाग कर फिर से खुद … Continue reading तू हर बार यूँ सफर पे क्या ढूंढ़ती है?

Sukun

Tu sukun ke talash mein Bhtakta rha Kabhi ise, too kabhi usse Puchta rha Is rishte mein, uss dosti mein Tu sukun dunta rha Kabhi labjun pe aake ruki btaon ke kha dene mein Kabhi Bina wajha hass dene mein Tu sukun dunta rha. Khane de swad mein Chai ki pyali mein Midai ki dabbe … Continue reading Sukun

I Fear When you say to Volunteer An event to make people smile, laugh I fear that I will burst into tears or I will take a corner and sit down there I fear some kid will then ask me why I am sad but I am just silent I fear you will not understand … Continue reading

ले चल कंही दूर मुझे

ले चल कंही दूर मुझे, हवाएँ हो साथ, और तेरा हाथों में हाथ| नदी की लहरों के पास, हिमालय की लय में बस तुम और मैं। ले चल कहीं दूर मुझे , जंहा ठहर जाये ये पल पत्तों के शोर में, और बहती लहरों के धुन पे ले चल मुझे कहीं दूर जहां मैं खुद … Continue reading ले चल कंही दूर मुझे

Let it be light

Don't hold too tight and stretch it it will break down. Let it be light lose, and dangling if it belongs to you it will be there no matter what If not then you will be free. So let it be lose and dangling like carefree wind around the tree.  

A question Without Question mark

It was not typo not a grammatical mistake. It was not an attempt to offense neither a choice of suspense. It was not because I was hurrying. It was not because I was drunk. Then? Might be because I assumed This will always be a question a known one for someone, I ask frequently the same one. A … Continue reading A question Without Question mark

जब हम बच्चे थे

Happy Children’s Day

Keep your child heart alive and live your childhood dreams 🙂

A Touch to Unkahi Batein

जब हम बच्चे थे,

हर बात पे मुस्कुराते थे,

चिड़िया उड़ के खेल खेल में हम भी उड़ जाते थे।

दुनिया के रिवाज़ों से परे ,

हर किसी को दोस्त बनाते।

जब हम बच्चे थे

मम्मी की उँगली छुरा कर,

हर बार उनसे आगे भगा करते थे।

बिना किसी बंदिश के हर किसी से मिला करते थे।

लोगों की भिड़ देख कर,

पापा के पीछे छिप जाते थे ।

जब हम बच्चे थे

मुस्कराहट हमारे यार हुआ करते थे और

दादी की उनकी कहानियां हमारी सहेलियां थीं

जब हम बचे थे

आसमान में जा रहे हवाई जहाजों को देख

हाथ हिलाते थे।

आईने में अपना चेहरा देख उसे कोई और बताते थे

दुकान पर जा कर हर बार वही इक टॉफी की मांग करते थे

पापा से हर महीने मिले दस रुपये से उनके लिए तौफे ख़रीदते

जब हम बच्चे थे

जल्दी से बड़े होने की ज़िद किया करते थे

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सन्नाटा

अजीब सा सन्नाटा है जैसे कोई शहर गुजर गया हो, सवालों के दरमियान जबावों के न मिलने का सन्नाटा है, सपनों की खामोशी से दम घोटने का सन्नाटा है, चारों तरफ इक तलाश के अधूरे रहने का सन्नाटा है | ये सन्नाटा है खामोशी नहीं ये सन्नाटा है, क्यूंकि इसकी कोई कहानी नहीं है खामोशी … Continue reading सन्नाटा