ले चल कंही दूर मुझे

ले चल कंही दूर मुझे,le chal3

हवाएँ हो साथ,

और तेरा हाथों में हाथ|

नदी की लहरों के पास,

हिमालय की लय में

बस तुम और मैं।

ले चल कहीं दूर मुझे ,

जंहा ठहर जाये ये पल

पत्तों के शोर में,

और बहती लहरों के धुन पे

ले चल मुझे कहीं दूर

जहां मैं खुद से मिलों

जहां मैं तुम से मिलों ,

ले चल कंही दूर मुझे ।

ले चल कंही दूर मुझे,

जंहा न डर हो तेरे जाने का

या मेरे खोने का,

जंहा तुम तुम हो

और मैं ,मैं

बिना किसी नकाब के,

छलावे से परे |

जंहा रास्ते नए हों ,

रोमाँच से भरे ।

ले चल कंही दूर मुझे

कहीं दूर सपनों से परे ।।

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