सन्नाटा

अजीब सा सन्नाटा है
जैसे कोई शहर गुजर गया हो,
सवालों के दरमियान जबावों के न मिलने का सन्नाटा है,
सपनों की खामोशी से दम घोटने का सन्नाटा है,
चारों तरफ इक तलाश के अधूरे रहने का सन्नाटा है |
ये सन्नाटा है खामोशी नहीं
ये सन्नाटा है, क्यूंकि इसकी कोई कहानी नहीं है
खामोशी भी सन्नाटे में कंही खो गई है|
शब्दों की आवाज़ चीख-चीख कर थक गई है
पर सन्नाटा अब भी है
और शब्दों को शर्मसार करते हुए तेजी से फैलती जा रह है|

3 thoughts on “सन्नाटा

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