बात

दिल की बात जुबां पर न आये तो हीं सही है
न कोई शिकवा होगी और ना हीं कोई शिकायत
बात भी अपनी होगी और कोई तकलीफ भी होगी नंही बात के अधूरे रहने की।
हम खुद से  हीं बातें कर खुश हो जाया करेंगे।

सपना अपना है और ख़्याल भी अपने हैं,
न तो ज़माने को बताना है न हीं खुद से छिपाना है।
आँखों में है और हर धड़कन जीती है उसे ,
जब सपने हकीक़त बन कर आएगी
तब लोग देखेगें और अपने हिस्से की
तारीफ बाटो र लेंगें।

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8 thoughts on “बात

  1. Beautiful poem !!

    Two lines , i have written for you

    मन की उलझन , मन ही जाने
    मैं जानु की ,या तू जाने
    जो जाने ,मन भाये

    बात करूँ मैँ , मन ही मन
    मन मेरा मुस्काये

    मुझको समझो ,आज कोई
    मन मेरा हर्षाय

    मुस्कान चेहरे की पढ़कर ,
    आईना मुझे बताये

    आँखे मेरी झुक जाती हैं
    नजरे ख़ुशी छुपाये

    मन की उलझन मन ही जाने
    मैं जानु , या तू जाने
    जो जाने , मन भाये ।

    निस्ठुर अनाड़ी

    तुम भी मुझ से बात करो

    Liked by 1 person

  2. Kya khoob
    Kabhi socha na tha…..
    Kya lafze kah payenge…
    Bas ek moka mila …
    Aur na rah paye…..
    Jiski pyas thi…wahi talaste kho gye
    Pata nahi chala kab
    Sapane soche aur….
    Adhure kaha rah gaye.

    Liked by 1 person

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