कोशिश

दो घड़ी आप से बात न हुई
तो आप और हमारे बीच
की दास्ताँ बदल गई
कल तक लोग हमें
हम से पहचनतें थे
और आज मैं और आप
से लोग जानते हैं हमें
न ख़ामोशी आप ने तोड़ी,
न मैंने कोशिश की।
फसलों  का क्या था,
वो तो खामोशी के साथ बढ़ती गई।
सबने वजह जानने की खूब शिदत् की,
पर हमने नहीं चाहा कभी
और शायद इसीलिए
लोग कहने लगे हम बदल गए
और दास्तां बदल गई।।

बदलाब

ना हम संभले थे कभी ना हम संभलना चाहते हैं
खोये हैं हम अपने सपनों में बेपरवाह जिंदगी से
है पहचान हमें सही गलत की नहीं चलते  भीड़ में आँखे बंद कर
दुनिया से अलग रहते हैं औरों से जुदा रहते हैं
पर दूनियादारी आती है हमें
हमें तोड़ने और जोड़ने की कोशिश मत करो ऐ दुनिया
हम जैसे हैं दुनिया बदलने की चाह रखते हैं
जंहा को खूबसूरत बनाने की तरक़ीब तलाशते हैं ।

बात

दिल की बात जुबां पर न आये तो हीं सही है
न कोई शिकवा होगी और ना हीं कोई शिकायत
बात भी अपनी होगी और कोई तकलीफ भी होगी नंही बात के अधूरे रहने की।
हम खुद से  हीं बातें कर खुश हो जाया करेंगे।

सपना अपना है और ख़्याल भी अपने हैं,
न तो ज़माने को बताना है न हीं खुद से छिपाना है।
आँखों में है और हर धड़कन जीती है उसे ,
जब सपने हकीक़त बन कर आएगी
तब लोग देखेगें और अपने हिस्से की
तारीफ बाटो र लेंगें।